शुभम गुर्जर – टिमरनी | रंग जीवन का उड़ा

रंग जीवन का उड़ा
आँखों से सपना बह गया
खो गई सारी खुशियाँ
बस खोखला शरीर रह गया
रूठ कर मुझसे कोई 
मेरा अपना खो गया
दिन का उजाला होकर भी
घनघोर अँधेरा छा गया
ज़िन्दगी कुछ तो बता
आखिर ये क्या होगा
पल भर की हैं सजा
या पूरा जीवन मुरझा गया

कविता – शुभम गुर्जर, स्थान – टिमरनी, कक्षा – 12 वी

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