मक्का की उन्नत खेती कैसे करें?

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advanced corn cultivation
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मक्का मुख्य रूप से खरीफ ऋतु की फसल है परंतु अब यह रवि और खरीफ दोनों ऋतु में बोई जाती है। या मनुष्य और जानवरों दोनों के लिए बहुत ही फायदेमंद है, मक्का कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्त्रोत है। साथी उद्योगों में भी बहुत सी चीजों को बनाने के लिए मक्का का उपयोग किया जाता है। मक्का के भुट्टे प्राप्त करने के बाद शेष बचा हुआ भाग पशुओं को चारे के रूप में खिलाया जाता है।

मक्का की बोनी के लिए जून महीना सबसे अच्छा होता है। अंतिम जुताई के बाद गोबर से निर्मित पूर्ण रूप से साड़ी में कंपोस्ट खाद हो खेतों में मिलाना चाहिए।

मक्का की फसल के लिए ऐसी भूमिका चुनाव करना चाहिए जहां पर पानी का निकास अच्छा हो।


किस समय में बुवाई करें

खरीफ :- जून और जुलाई प्रारंभ के महीने में

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रवि :- अक्टूबर माह से नवंबर माह अंत तक

जायद :- फरवरी अंतिम से मार्च तक


अच्छी मक्का की किस्में?

1. गंगा 5 :- इस किस्म की अवधि 100 दिनों की होती है और प्रति हेक्टेयर उत्पादन 50 से लेकर 80 कुंटल तक है।

2. डेक्कन 101 :- इस किस्म की समय अवधि 105 से 115 दिन है और उत्पादन प्रति हेक्टेयर 60 से लेकर 65 क्विंटल तक है।

3. डेक्कन 103 :- इस किस्म की समय अवधि 110 दिन से लेकर 115 दिन की होती है और उत्पादन प्रति हेक्टेयर 60 से 65 क्विंटल तक होता है।

4. गंगा 11 :- इस किस्म की समय अवधि 100 से लेकर 105 दिनों की होती है और उत्पादन प्रति हेक्टेयर 60 से लेकर 70 क्विंटल तक होता है।

5. गंगा सफेद 2 :- इस किस्म की समय अवधि 105 से लेकर 110 दिनों की होती है और उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से लेकर 55 क्विंटल तक का होता है।

6. चंदन मक्का 1 :- यह किस्मत सामान्य समयावधि में पकने वाली है इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से 60 क्विंटल है।

7. चंदन मक्का 3 :- यह कैसा मक्का की जल्दी पकने वाली किसमें है इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से लेकर 55 क्विंटल है।

8. चंदन सफेद मक्का 2 :- यहां मक्का की सबसे जल्दी पकने वाली किस्म है इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से लेकर 60 क्विंटल तक है।


बीज का उपचार कैसे करें

मक्का की बुवाई से पहले बीज का उपचार करना बहुत ही जरूरी है, बोने से पूर्व किसी भी फफूंद नाशक दवाई थायरम या एग्रोसेन जी एंन 2.5 से 3 ग्राम प्रति क्विंटल की दर से उपचारित करके बुवाई करनी चाहिए। आप एजोस्पाय रिलाम या PSB कल्चर 5 से 10 ग्राम प्रति किलो से बीज का उपचार कर सकते है।


बुवाई कैसे करें

मक्का की फसल को बोलने के लिए जून और जुलाई का महीना सबसे अच्छा है, जब वर्षा प्रारंभ हो तब मक्का बोना चाहिए यदि वर्षा से पहले आपके पास कोई सिंचाई का साधन हो तो 10 से 15 दिन पहले भी आप बोनी कर सकते है, इससे पैदावार मे वृध्दि होती है। बीज की बुवाई मेंड़ के किनारे व उपर 3-5 सेंटीमीटर की गहराई पर करनी चाहिए। बुवाई के एक माह बाद मिट्टी चढ़ाने का कार्य करना चाहिए, ओर बुवाई किसी भी विधी से की गई हो परन्तु खेत मे पौधों की संख्या 55 से लेकर 80 हजार प्रति हेक्टेयर रखना चाहिए।

  1. शीघ्र पकने वाली किस्मों में कतार से कतार- की दूसरी लगभग 60 से.मी. होनी चाहिए और पौधे से पौधे-20 से.मी. की दूरी पर होना चाहिए।
  2. मध्यम/देरी से पकने वाली किस्मों में कतार से कतार की दूरी लगभग 75 से.मी. और पौधे से पौधे-25 से.मी. की दूरी पर होना चाहिए।
  3. हरे चारे के लिए कतार से कतार 40 से.मी. की दूरी पर ओर पौधे से पौधे-25 से.मी. की दूरी पर होना चाहिए।

खाद एवं उर्वरक की मात्रा कितनी होनी चाहिए

  • शीघ्र पकने वाली :- 80 : 50 : 30 (N:P:K)
  • मध्यम पकने वाली :- 120 : 60 : 40 (N:P:K)
  • देरी से पकने वाली :- 120 : 75 : 50 (N:P:K)

भूमि की तैयारी करते समय 5 से 8 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद को खेत मे मिलाना चाहिए, तथा भूमि परीक्षण उपरांत जहां जस्ते की कमी हो वहां 25 कि.ग्रा./हे जिंक सल्फेट वर्षा से पूर्व डालना चाहिए। 

1. नत्रजन :- इसकी एक तिहाई मात्रा बुवाई के समय डालनी चाहिए उसके बाद एक तिहाई मात्रा फसल को बोलने के एक महीने बाद डालना चाहिए और एक तिहाई मात्रा जब पौधों में पुष्प या छोटे भुट्टे आने लगे तब डालनी चाहिए।

2. फास्फोरस व पोटाश :- फास्फोरस और पोटाश को बुवाई के समय डाल देना चाहिए ताकि शुरुआत से ही पौधे को अच्छी बढ़त मिले।


मक्का में निराई-गुड़ाई कब करे ?

फसल से खरपतवार का नियंत्रण बहुत जरूरी है, बोने के 15 से 20 दिन बाद डोरा चलाकर निंदाई-गुड़ाई करनी चाहिए या रासायनिक निंदानाशक मे एट्राजीन नामक निंदानाशक का प्रयोग करना चाहिए। एट्राजीन का उपयोग हेतु अंकुरण पूर्व 600 से 800 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। इसके उपरांत लगभग 25 से 30 दिन बाद मिट्टी चढावें।


सिंचाई की कब जरूरत है।

सभी फसल में सिंचाई की आवश्यकता तो होती ही है, लेकिन सिंचाई का क्या समय है, और कितनी मात्रा में सिंचाई करें यह बहुत महत्वपूर्ण होता है। मक्का की पूरी फसल अवधि में लगभग 400 से 600 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है, और यह अलग-अलग मिट्टी के ऊपर भी निर्भर करता है, कहीं पर पानी की आवश्यकता ज्यादा भी हो सकती है, और यदि खेत में नमी पर्याप्त मात्रा में हैं तो वहां सिंचाई कम मात्रा में करनी पड़ती है।

आप एक बात का और विशेष ध्यान रखें की खेत में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। खेत में अधिक समय तक कहीं पर भी पानी भरा हुआ ना हो इससे पौधों की जड़ों में सड़न चालू हो जाती है, मक्का में मुख्य रूप से सिंचाई की जरूरत जब भुट्टो में दाने आ रहे हैं, उस समय पर पड़ती है।


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